20 अक्टूबर 2026 - 16:54
अमेरिकी युद्ध मंत्री का गुप्त इस्राईल दौरा, क्या ईरान पर फिर हमले की तैयारी?

यात्रा की गोपनीयता और दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के एजेंडे को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

अमेरिका और इस्राईल के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की इस्राईल यात्रा ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बिना किसी पूर्व घोषणा के मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को चुनाव में अपना समर्थन दिया है और ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी बयान दिए हैं।

अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, हेगसेथ और नेतन्याहू की मुलाकात सोमवार को दक्षिणी इस्राईल के ओवदा एयरबेस पर हुई। इस यात्रा के बारे में पहले से कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई थी।

अमेरिकी युद्ध मंत्रालय पेंटागन और वॉशिंगटन स्थित इस्राईली दूतावास ने इस मामले पर रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया। हालांकि, हेगसेथ ने मध्य पूर्व की यात्रा करने की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कहां गए और किन अधिकारियों से मिले।

यात्रा की गोपनीयता और दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के एजेंडे को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

हेगसेथ का यह दौरा इस्राईल में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से आठ दिन पहले हुआ। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद ग़ज़्ज़ा में शुरू हुए युद्ध के बाद यह पहला चुनाव बताया जा रहा है।

इससे एक दिन पहले, रविवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नेतन्याहू के समर्थन में पोस्ट किया था। उन्होंने नेतन्याहू को एक मजबूत प्रधानमंत्री और शांति स्थापित करने में बेहतर साझेदार बताया।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर इस्राईल में नेतन्याहू के अलावा कोई दूसरा नेता सत्ता में आता है, तो ईरान के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी अमेरिका को खुद संभालनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि वह ऐसा करने के इच्छुक नहीं हैं।

ट्रंप ने अपने संदेश में नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुने जाने की दौड़ में पूरा समर्थन देने की बात कही। उनके इस बयान को इस्राईल की घरेलू राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

हेगसेथ और नेतन्याहू की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच ईरान को लेकर सुरक्षा और सैन्य मुद्दे पहले से चर्चा में हैं।

रिपोर्टों में अमेरिका और इस्राईल के बीच ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर बातचीत होने की बात कही गई है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि दोनों नेताओं ने इस बैठक में किसी संयुक्त हमले की योजना को अंतिम रूप दिया है।

कुछ विश्लेषकों ने संभावना जताई है कि ट्रंप प्रशासन नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले या उसके बाद ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल इसे संभावित परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी घोषित सैन्य फैसले के तौर पर।

इस गुप्त यात्रा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वॉशिंगटन और तेल अवीव ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति में कोई नया कदम उठाने जा रहे हैं।

एक तरफ ट्रंप ने नेतन्याहू के प्रति राजनीतिक समर्थन जताया है, वहीं दूसरी ओर हेगसेथ की इस्राईल यात्रा ने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की ओर ध्यान खींचा है।

हालांकि, जब तक बैठक के एजेंडे या किसी संभावित सैन्य योजना के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक इसे ईरान पर संयुक्त हमले की तैयारी का पक्का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

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